dhairya

धैर्य की परीक्षा

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वैलेंटाइन पर विलेन बन गईं सहेलियां

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क्या दिलों ने भी टूटने के लिए यही दिन चुना था ..? निषी की फ्रेंड रोषनी खुषी से झूम उठी थी और बाकी सहेलियां षाॅक्ड रह गईं थीं। दरअसल निषी ने अपनी सभी सहेलियों से षर्त लगा रखी थी, कि इस वैलेंटाइन को रोहित आॅफीषियली उसका हो ही जायेगा पर …

वैलेंटाइंस डे निकल गया …? गुलाब के गोदाम खाली हो गए ..? गिफ्टस के शोरूम्स में पिछले कई महीनों से रखे गुड्डे-गुडि़ए भी आफ्टरआॅल बिक ही गए। बजरंग दल और शिवसेना जैसे मोहब्बत के विलेन से बचकर देश भर में खूब इश्क लड़ाया गया। आइए इस बीते हुए ’इज़हार दिवस’ पर दो गानों को प्यार के परिंदों पर फिट बेठाने की कोशिश करते हैं। ’अपनी तो जैसे-तैसे कट जायेगी ..आप का क्या होगा …?’’ दूसरा थोड़ा इंतज़ार का मज़ा लीजिए ’’… !
जिन लड़कों को हसीन हसीनाओं ने रिजेक्ट करते हुए ’नाॅट नाउ’ कहा, वे तो मन में ठान बैठे कि ’’चलो अपनी तो जैसे तैसे कट जायेगी …. आपका क्या होगा …? लेकिन जिन मैडम्स ने ब्यूटी सलून जाकर अच्छे से फिगर-फेशियल करवाया था .. और उन्हें किसी खास ’मिस्टर राइट’ से उम्मीद थी, कि वो उनके कदमों में झुककर उनके काॅस्मेटिक चेहरे का चांद से कंपेरिज़न करेगा, अपने हाथों से वादों का गुलाब और इरादों का गिफ्ट देगा, वो तो उनकी सहेली को प्रपोज़ कर गया, और साहिबां देखतीं रह गईं। ऐसी ही एक ’हेट स्टोरी’ जिसमें सहेली बन गई विलेन।
निशिका की इसी साल काॅलेज में एंट्री हुई थी। मैनेजमेंट में बैचलर कर रही निशी, सैकंड सैमेस्टर में ही अपने क्लासमेट रोहित को दिल दे बैठी। रोहित अभी भी खुद को निशी का ’आॅन्ली फ्रेंड’ ही कंसीडर कर रहा था। काॅलेज-कैंटीन में उनकी गपशप घंटों चलती थी, काॅरीडोर में हाथों में हाथ डाले रोहित-निशी, ’लव वर्ड्स’ का टाइटल बन चुके थे। निशी ने अपनी सभी सहेलियों से शर्त लगा रखी थी, कि इस वैलेंटाइन को रोहित आॅफीशियली उसका हो ही जायेगा। जैसे-जैसे ’इश्क डे’ करीब आ रहा था। निशी का दिल धड़कते-धड़कते जैसे बाहर ही आता जा रहा था।
14 फरवरी आई, रोहित को लेकर निशी से ज्यादा उसकी सहेलियां ऐक्साइटिड थीं। आखिर हों भी क्यूं ना …?उसका स्टाइल, उसकी स्माइल, गुच्ची-लिवाइस के टैग्स, फास्ट्रैक की एक्सेसरीज़ …. इन ब्राण्ड्स की पहचान ही मानो रोहित से थी और रोहित की आइडेंटिटी बन चुके थे ये ब्राण्ड्स । अचानक बाइक से दनदनाते हुए साहबज़ादे एंट्री किए, दांतों में लंबी डंडी वाला गुलाब था, चेहरे पर स्माइल, और बाकी बाॅडी तो बस ब्राण्ड्स से फुलफिल्ड थी। बाइक के डिस्क ब्रेक्स लगे, निशी का दिल थमा, इधर रोहित टर्न हुआ, वहां निशी ने क्यूट स्माइल दी। एक पाॅकेट से रोहित ने कुछ कागज़ जैसा निकाला, वहीं निशी ने रोहित के लिए खरीदी राडो की घड़ी बाॅक्स से निकाल ली। ……… पर अचानक फीलिंग्स की सुनामी …… दोनों दिलों में ज़ोरों की हलचल ……!
ये क्या ….? निशी ज़रा आगे बढ़ती है, रोहित थोड़ा साइड से कदमों को लेफ्ट की ओर खींचता है …..’’हाइ रोशनी …! एक्च्युअली मुझे तुमसे काॅलेज के फस्र्ट डे से कुछ कहना था ….पर आज हिम्मत जुटा पाया हूं … देखो ना ….? मैं और निशी कितने अच्छे दोस्त हैं, पर प्यार .. प्यार तो मुझे सिर्फ तुमसे ही था। मेरे सपनों में तुम्हारी मुस्कान, ख्वाबों में तुम्हारी ही बातें रहतीं हैं …. ’विल यू बी माइ वेलेंटाइन ……? निशी का चेहरा लाल …. मेकअप गायब ….राडो की घड़ी पर आंसुआंे की बूंदें, ना चाहते हुए भी बड़ी मुश्किल से उसके चेहरे पर हल्की मुस्कराहट जि़ंदा है …! क्या दिलों ने भी टूटने के लिए यही दिन चुना था ..? निशी की दोस्त रोशनी खुश और बाकी सहेलियां शाॅक्ड हैं। रोशनी ’आई लव यू टू माइ हैंडसम’ बोलकर प्रपोज़ल एक्सेप्ट करती है, और रोहित को हग करती है।
आंसुओं को दिल की तरफ भेजकर निशी रोशनी को काॅग्रैट्ज़ करती है, और वापस लौट जाती है। दरअसल इस वैलेंटाइंस डे पर जिन लड़कियों को उनके ड्रीमब्वाॅय से उम्मीद और ’ओवरएक्सपैक्टेशन थी, उन्हें हल्की निराशा झेलनी पड़ी। ब्वाॅयफ्रेंड्स के साथ ज़्यादा वक्त गुज़ारना रिलेसनशिप में हल्का बोरिंग साबित हुआ । ऐसे मौकों का फायदा सहेलियों ने जमकर उठाया।
इस माॅडर्न ज़माने में भी तमाम प्रेमियों की ’हेट स्टोरी’ निशी-रोशनी-रोहित से मिलती-जुलती रही। ऐसे में लड़कियों को कुछ की प्वाइंट्स ध्यान में रखने होंगे। नंबर एक तो यही कि अपनी सहेलियों से ज़रूरत से ज्यादा ’शेयरिंग’ रिश्ते के लिए इंज्यूरियस हो सकती है। हां एक बात और जिन गाॅर्जियस गल्र्स को उनके मि. राइट ने ठुकराकर साइड वाली मैम साहब को वैलेंटाइन बना लिया, वे अब सफाई में सिर्फ इतना ही कह पा रहीं हैं ’’ऐक्च्युअली मुझे प्यार-व्यार के चक्कर में पड़ना ही नहीं था। वैसे भी अगले महीने बोर्ड एग्ज़ाम्स जो हैं।
अब निशी और उस जैसी बाकी लववर्ड्स को इतना कहना तो बनता ही है ….’’थोड़ा इंतज़ार का मज़ा लीजिए …….! ड्यूरिंग लव-शव, सहेलियों से दूरी बना लीजिए …!

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
February 20, 2013

लगता है बहुत शोध किया है आपने इस विषय में ! अच्छा लगा मयंक कुमार जी !

Santlal Karun के द्वारा
February 18, 2013

आदरणीय मयंक जी, इस लघु कथा या संस्मरण में आप ने अधुनातन विलेन और विलेनियों के वेलेंटाइन डे तथा वेलेंटाइन डे के केन्द्रक में ‘स्टाइल’, ‘स्माइल’, ‘गुच्ची-लिवाइस के टैग्स’, ‘फास्ट्रैक की एक्सेसरीज़’, ब्राण्ड्स बस ब्राण्ड्स से फुलफिल्ड जीवन और जीवन-शैली को बखूबी उभारा है– “बाइक के डिस्क ब्रेक्स लगे, निशी का दिल थमा, इधर रोहित टर्न हुआ, वहां निशी ने क्यूट स्माइल दी।” पर यदि हम पुराणपंथी इस कथा के दूसरे पक्ष को उभारें तो नई पीढ़ी को अविश्वसनीय लगेगा | निवेदन है कि उस दूसरे पक्ष को उभारने का दायित्व आप-जैसे नई चेतना और शैली के चेताओं के ही कंधे पर है | हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    mayankkumar के द्वारा
    February 19, 2013

    आपकी सलाह और प्रतिक्रिया का आभारी, ऐसे ही मार्गदर्षन करते चलें !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 17, 2013

नेक सलाह बधाई

    mayankkumar के द्वारा
    February 19, 2013

    ऐसे ही मार्गदर्षन करते चलें !


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